Malgudi Days stories of every one from everywhere!

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Malgudi days is a series made by India Doordarshan back in the 1986. The excellent writing style of the famous writer RK Narain and the hard workf actors and directors of the series make this series of short TV plays unique and un-compareable.

Forty Five A Month a play

Translated into Urdu Hindi Tamil Sindhi

पैंतालीस रुपये महीना – मालगुडी डेज़

एक बच्ची की उम्मीद, पिता की बेबसी, और पाँच रुपये की तनख्वाह बढ़ने की कड़वी खुशी।

शांता एक प्यारी सी बच्ची थी। उसके पिताजी, वेंकट राव, एक दफ्तर में काम करते थे जहाँ उन्हें सिर्फ पैंतालीस रुपये महीने की तनख्वाह मिलती थी।

एक दिन शाम को शांता ने कहा, "पापा, आपने कहा था शुक्रवार को मुझे सिनेमा ले चलेंगे।" वेंकट राव मुस्कराए, लेकिन अंदर से परेशान थे। दफ्तर के सख़्त नियम और डरावने बॉस उनके मन पर भारी थे।

शुक्रवार को उन्होंने हिम्मत की। शाम पाँच बजे ऑफिस से चुपचाप निकल गए। रास्ते में बेटी की हँसी, उसकी खुशियाँ, सब आँखों के सामने घूमती रहीं۔

लेकिन जब वे घर पहुँचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। शांता उन्हें इंतज़ार करते करते रोते हुए सो गई थी। वेंकट राव चुपचाप बैठ गए। उन्होंने कोशिश की थी — मगर ज़िंदगी की ज़िम्मेदारियों ने फिर जीत ली।

अगले दिन बॉस ने उन्हें बुलाया। वे डरते हुए गए, लेकिन बॉस ने कहा: "तुम वफादार कर्मचारी हो, तुम्हारी तनख्वाह अब पचास रुपये महीना होगी।"

वेंकट राव हल्के से मुस्कराए। पाँच रुपये की बढ़ोतरी... लेकिन उस एक पल की कीमत शायद बहुत ज़्यादा थी।

🌿 इस कहानी से सीख:

  • माता-पिता बच्चों की खुशी के लिए अपनी इच्छाएँ दबा देते हैं।
  • वक़्त, पैसों से ज़्यादा अनमोल होता है।
  • छोटी-छोटी बातें जीवन भर याद रह जाती हैं।