Malgudi Days stories of every one from everywhere!

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Malgudi days is a series made by India Doordarshan back in the 1986. The excellent writing style of the famous writer RK Narain and the hard workf actors and directors of the series make this series of short TV plays unique and un-compareable.

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Translated into Urdu Hindi Tamil Sindhi

नागा – मालगुडी डेज़

मालगुडी की एक तंग गली में एक लड़का अपने पिता के साथ रहता है। उसका पिता सड़क पर साँप का खेल दिखाता है। उसकी ज़िंदगी में न स्कूल है, न दोस्त, न खेल — बस काम, अभ्यास और गुज़र-बसर।

लड़का अक्सर बाहर बच्चों को खेलते हुए देखता है। वह भी खेलना चाहता है, लेकिन उसके पिता उसे सख्ती से मना करते हैं।

पिता उसे एक साँप के साथ खेलना सिखाते हैं। उस साँप का नाम है नागा। शुरू में डर लगता है, लेकिन समय के साथ नागा उसका साथी बन जाता है। वह बाँसुरी बजाना सीखता है, साँप को नचाना सीखता है, और शो में हिस्सा लेता है।

पड़ोस में एक औरत रहती है। वह उसकी सौतेली माँ नहीं, लेकिन पिता से अकसर बात करती है, हँसती है, मुस्कुराती है। लड़का उसे पसंद नहीं करता। उसे लगता है कि वह उसके घर और पिता के बीच आ गई है।

पिता सख्त हैं, स्नेही नहीं। उनके लिए बेटा एक सहायक है — एक कलाकार का साथी। लड़का चुपचाप सब सहता है। और करे भी क्या?

एक दिन पिता एक छोटा बंदर लेकर आते हैं। बंदर चंचल है, शो में सबका ध्यान खींचता है। लड़का ईर्ष्या नहीं करता — सीखता है। वह नागा की तरह बंदर के साथ भी काम करना सीखता है।

समय के साथ पिता उसे खुद बंदर पकड़ना सिखाते हैं। यह प्यार नहीं, ज़िंदगी जीने की तैयारी है। लड़का समझ जाता है — इस दुनिया में बचपन की कोई जगह नहीं, सिर्फ हुनर की।

वह सबकुछ स्वीकार कर लेता है। ना मजबूरी में, बल्कि इसलिए कि:

ज़िंदगी आसान नहीं होती — फिर भी चलती रहती है।

वह बाँसुरी, नागा और एक छोटी सी उम्मीद लेकर बाहर निकलता है। और शायद... एक दिन, वह भी आज़ाद हो जाएगा।

🌿 कहानी का संदेश?

कोई विशेष संदेश नहीं। बस ज़िंदगी।
कठिन, निष्ठुर, लेकिन जीनी तो है।